1. ऋग्वेद
2. यजुर्वेद
3. सामवेद
4. अथर्वेद
1. ऋग्वेद
ऋग्वेद का अधिकांश भाग देव स्तुतियों से भरा हुआ है इसके कुछ मंत्र ऐतिहासिक घटनाओं का उल्लेख करते है ऋग्वेद काल की एक परमुख घटना दस राजाओं का युद्ध का उल्लेख ऋग्वेद में मिलता है ऋग्वेद की पांच शाखाएं 1 शाकल 2 वास्कल 3 अश्वलायन 4 शंखआयन 5 मांडय है ऋग्वेद में 10 मंडल एवम 1028 सूक्त एवम विभिन्न ऋषियों द्वारा रचित कुल 10580 रचनाएं है गायत्री मंत्र का उल्लेख ऋग्वेद में ही पाया जाता है जो तीसरे मंडल में ही पाया जाता है
2. यजुर्वेद
यजुर्वेद में यज्ञों के नियमो एवम विधि विधानों का संकलन मिलता है यह कर्मकांड प्रधान है इन ग्रंथों में से आर्यों के सामाजिक धार्मिक जीवन पर प्रकाश पड़ता है यजुर्वेद के दो शाखाएं निम्न है
(1) शुक्ल यजुर्वेद. इसे वाजशनेय संहिता भी कहते है इसकी दो शाखाएं माध्येंदीन एवं काणव है यह उत्तर भारत में परचलित है
(2) कृष्ण यजुर्वेद. इसकी शाखाएं काठक कठ कपिष्ठल मेत्रयानी एवम तेतरिय है यह दक्षिण भारत में परचलित है यजुर्वेद की उक्त दो शाखायो में अंतर यह है की शुक्ल यजुर्वेद की शाखा में केवल मंत्रों को स्थान मिला है जबकि कृष्ण यजुर्वेद में मंत्रो के साथ उनकी व्याख्या एवम यज्ञ से जुड़े हुए कर्म काण्ड का भी उल्लेख प्राप्त होता है
3. सामवेद
साम का सब्दिक अर्थ गान है इसमें मुख्यत यज्ञों के अवसर पर गाए जाने वाले मंत्रो का संग्रह है इसे भारतीय संगीत का मूल कहा जाता है सामवेद में 1810 सूक्त है जो सीधे ऋग्वेद से लिए गए है किंतु इनको गेय बनाने के लिए लयबद्ध किया गया है सामवेद की शाखाएं कोथूम राणायनीय तथा जेमिनिय अथवा तवलकार है
4. अथर्ववेद
भारत के संस्कृति परम्परा की दृष्टि से अथर्ववेद का महत्तव इसलिए अधिक है क्योंकि इसमें मनुष्य के विचारो एवम अंधविश्वासों का उल्लेख मिलता है इसमें कुल 731 श्लोक (शुक्त) एवम लगभग 6000 पद है इनमे विविध विषयों जैसे. आयुर्वेद चिकत्सा भूतप्रेत जादू टोना राजभक्ति विवाह एवम प्राण्यागीतओ आदि का विवरण मिलता है अथर्वेद की शाखाएं शोनक एवम पिपलाद है वेद संस्कृत भाषा में पद में लिखे गए है यजुर्वेद गध एवम पध दोनों में है
No comments:
Post a Comment